भोट वाली माता मंदिर: चंबल के बीहड़ों के बीच एक दिव्य मंदिर - इटावा
इटावा के बीहड़ों में स्थित भोट वाली माता मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती पिण्ड रूप में विराजमान हैं। यहाँ की यात्रा और मान्यताओं की पूरी जानकारी।

भोट, इटावा , 15 अक्टूबर, 2026: इटावा शहर की चहल-पहल से दूर, गहरी घाटियों में, भोट वाली माता का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। भोट गांव के पास स्थित यह स्थान भगवान शिव और देवी पार्वती की पिंड रूप में पूजा का पवित्र स्थल है। मंदिर चंबल की घाटियों के ऊबड़-खाबड़ भूभाग से घिरा हुआ है, जिसमें गहरी खाइयां और घने जंगल हैं। भोट गांव पार करने के बाद घाटियों से होते हुए 2 किलोमीटर का रास्ता तय करके मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। इस स्थान के पार चंबल नदी के उस पार बरेचा गांव (पिन नंबर 206125) स्थित है।
इस मार्ग पर इटावा से फूप रोड पर कार के लिए करीब ₹50 और फूप से भोट रोड पर एक तरफ का टोल करीब ₹35 है। मंदिर के बाईं ओर चंबल नदी का किनारा है, जहाँ कछुए, घड़ियाल और मगरमच्छ बड़ी संख्या में हैं। दाईं ओर घना बीहड़ जंगल है, जहाँ तेंदुए रहते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, तेंदुए कभी-कभी मंदिर के आसपास दिखाई देते हैं, इसलिए रात में यहाँ कोई नहीं रुकता।
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मथुरा: दिव्यांग प्रमाण पत्र और UDID कार्ड बनवाने की ऑनलाइन प्रक्रियाकहा जाता है कि इन बीहड़ों में राज करने वाले डकैत भी माता के भक्त थे और नवरात्रों में झंडा चढ़ाकर आशीर्वाद मांगते थे। मंदिर के महंत शैलेश यादव हैं, जिन्हें गुरु जी कहा जाता है। वे मंदिर के एकमात्र पुजारी हैं और हर शनिवार यहाँ विशेष यज्ञ-अनुष्ठान करते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में वे पूरे समय मंदिर में भगवान शिव और माता की सेवा करते हैं।
शनिवार को गायत्री माता और दस महाविद्याओं को समर्पित यज्ञ होता है, जो करीब 2 घंटे चलता है। शाम का हवन विशेष होता है, जिसकी अग्नि की लौ 3 से 5 फीट तक ऊँची उठती है। इसमें भक्त द्वारा लाई गई करीब 55 प्रकार की सामग्री लगती है, 1300 मंत्रों का उच्चारण होता है और यह करीब 3 घंटे चलता है। मंदिर में कोई चढ़ावा, दान, फल, मिठाई या प्रसाद स्वीकार नहीं किया जाता। हवन सामग्री बचने पर भक्त को वापस कर दी जाती है।
गुरु जी आने वाले भक्तों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन देते हैं और घर पर करने के लिए विशेष पूजा या उपाय बताते हैं। साथ ही एक नारियल दिया जाता है, जिसे घर में कलश पर स्थापित करना होता है। मनोकामना पूरी होने पर एक वर्ष के भीतर नारियल वापस मंदिर में चढ़ाना होता है। बीहड़ों के एकांत में स्थित यह मंदिर अपनी शांति और आध्यात्मिक शक्ति के लिए जाना जाता है।

स्पर्श अग्रवाल
रिपोर्टर
स्पर्श अग्रवाल एक विश्लेषणात्मक पत्रकार और मीडिया पेशेवर हैं, जो वर्तमान में समाचार नेटवर्क मथुरा नाउ के लिए क्षेत्रीय घटनाक्रम, सार्वजनिक नीति और व्यावसायिक रुझानों को कवर करते…
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