वृंदावन स्थित प्राचीन इमलीतला मंदिर का इतिहास और मान्यताएं
वृंदावन के सेवा कुंज मार्ग पर स्थित इमलीतला मंदिर का इतिहास, चैतन्य महाप्रभु से जुड़ाव और दर्शन का समय जानें।

वृंदावन, 2 नवंबर, 2026: वृंदावन के पवित्र नगर में स्थित इमलीतला मंदिर आध्यात्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सेवा कुंज मार्ग पर यमुना नदी के तट के पास स्थित यह मंदिर अपनी दिव्य कथाओं के लिए जाना जाता है। मंदिर का नाम यहाँ स्थित एक अत्यंत प्राचीन इमली के पेड़ के नाम पर पड़ा है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है।
आध्यात्मिक महत्व और मान्यताएं
स्थानीय परंपराओं के अनुसार, यह स्थान राधा रानी से जुड़ी एक दिव्य घटना का साक्षी है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण द्वारा प्रेमपूर्वक आलता लगाए जाने के बाद जब राधा रानी वहां से निकलीं, तो उनका पैर इमली के पेड़ से छू गया, जिससे आलता छूट गया। इससे नाराज होकर राधा रानी ने श्राप दिया, जिसे स्थानीय लोग एक दिव्य वरदान मानते हैं। इसी कारण मान्यता है कि पूरे ब्रज चौरासी कोस में इमली के पेड़ पर फल नहीं पकते हैं। आज भी मंदिर में वह पेड़ सूखे रूप में संरक्षित है।
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वृंदावन में पंडित श्याम सुंदर शर्मा का कांग्रेस में स्वागतइस कथा के अलावा, यह मंदिर भगवान कृष्ण और चैतन्य महाप्रभु से जुड़ा है। मान्यता है कि इसी पेड़ के नीचे राधा रानी के वियोग में भगवान कृष्ण का रंग सुनहरा (गौर) हो गया था। लगभग 500 वर्ष पूर्व चैतन्य महाप्रभु ने इसी वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या, भजन और हरिनाम संकीर्तन किया था, जिससे यह स्थान उनके अनुयायियों के लिए अत्यंत पूजनीय है।
मंदिर के विग्रह और दर्शन की जानकारी
मंदिर में श्री राधा-गोपीनाथ, नितई-गौरांग और चैतन्य महाप्रभु की बैठी हुई सुंदर प्रतिमाएं विराजमान हैं। यह मंदिर सभी आगंतुकों के लिए ध्यान और प्रार्थना का एक शांत वातावरण प्रदान करता है।
मंदिर दर्शन के लिए सुबह 5:30 AM से 12:00 PM और शाम 4:00 PM से 8:30 PM तक खुला रहता है। मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है। यह बांके बिहारी मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और मथुरा जंक्शन से इसकी दूरी लगभग 13-14 किलोमीटर है।
श्रद्धालुओं के लिए व्यावहारिक सुझाव
आगंतुकों को सलाह दी जाती है कि वे इमलीतला मंदिर को अपनी वृंदावन की परिक्रमा में शामिल करें, क्योंकि यह मंदिर परिक्रमा मार्ग पर ही स्थित है। मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं को क्षेत्र में बंदरों से सावधान रहने की सलाह दी है। अपने आसपास और सामान के प्रति सतर्क रहकर श्रद्धालु इस ऐतिहासिक स्थल पर शांतिपूर्वक दर्शन कर सकते हैं।
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समाचार डेस्क
संपादक
मथुरा नाउ न्यूज़ डेस्क, मथुरा नाउ की आधिकारिक संपादकीय टीम है, जो मथुरा-वृंदावन से संबंधित स्थानीय समाचार, ब्रज संस्कृति, मंदिर संबंधी मामले, नागरिक विकास, आध्यात्मिकता, त्योहार…
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